क्या व्यायाम मूत्र संक्रमण के लिए अच्छा है?HealthPlanet

Posted on Wed 7th Dec 2022 : 13:06

'योग मुद्रा, प्राणायाम और सूर्य नमस्कार की मदद से आप यूरिनरी ट्रेक्‍ट इंफेक्‍शन को रोकने और मैनेंज कर सकती हैं। योग विशिष्ट मसल्‍स समूहों पर काम करता है और पेट की मसल्‍स को टोन करने में मदद कर सकता है। यह यूटीआई को रोकने के लिए बहुत प्रभावी है।

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सूर्य नमस्‍कार

सूर्य नमस्कार 8 अलग-अलग मुद्राओं का एक कॉम्बिनेशन है, जो शरीर के दोनों किनारों दाएं और बाएं के लिए 12 चरणों के अनुक्रम में पिरोया जाता है। सूर्य नमस्कार को दाईं ओर से शुरू किया जाता है क्योंकि सूर्य की एनर्जी को सही के माध्यम से प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया जाता है। एक पूर्ण चक्र दाएं और बाएं दोनों पक्षों को कवर करते हुए 24 गणनाओं से बना है।

भस्त्रिका प्राणायाम

इसे करने के लिए अपनी पीठ सीधी करके बैठें और आंखें बंद कर लें।
हथेलियों को घुटनो पर रखें।
पूरक (अंदर सांस लेना) और रेचक (सांस छोड़ना) 1:1 के अनुपात में करें।
जैसे आप 6 गिनती में सांस अंदर लें और 6 गिनती में सांस छोड़ दें।
आप सांस लेने की प्रक्रिया की शुरुआत 5 मिनट से कर सकते हैं और फिर धीरे-धीरे इस अवधि को बढ़ाएं।

उत्कटासन

इसे चेयर पोज के नाम से भी जाना जाता है।
इसे करने के लिए सीधी खड़ी हो जाएं।
दोनों पैरों को फैला लें।
दोनों हाथों को आगे की तरफ फैलाएं।
हथेली नीचे की तरफ रहेगी।
हाथ सीधे रहें और कुहनियां मुड़ी हुई न हों।
घुटनों को धीरे-धीरे मोड़ें और पेल्विस को नीचे की तरफ ले जाएं।
इतना झुकें, जैसे आप किसी काल्पनिक चेयर पर बैठे हुए हों।
इस दौरान हाथ एकदम सीधे होने चाहिए।
रीढ़ की हड्डी पूरी लंबाई में सीधी होनी चाहिए।
दिमाग को शांत रखें, लंबी सांसें लें।
इस मुद्रा में कुछ देर तक रहें।

त्रिकोणासन

त्रिकोण' का अर्थ होता है त्रिभुज और आसन का अर्थ योग है। इसका मतलब यह हुआ कि इस आसन में शरीर त्रिकोण की आकृति का हो जाता है, इसीलिए इसका नाम त्रिकोणासन रखा गया है।

इस योग को करने के लिए सीधी खड़े हो जाएं।
फिर दोनों हाथों को कंधे की चौड़ाई में सीधा कर लें।
अब दाई तरफ झुकते हुए हाथ को अंगुठे तक लाएं।
थोड़ी देर इसी पोजीशन में रहें।
इसी प्रक्रिया को दूसरी तरफ से भी करें।

मलासन

घुटनों को मोड़कर मल त्याग करने वाली अवस्था में बैठें।
दोनों हाथों को कोहनियों से मोड़कर घुटनों पर टिका दें।
दोनों हाथों की हथेलियों को आपस में मिलाएं।
हाथ जोड़कर नमस्कार की मुद्रा बना लें।
इस आसान में आपको धीरे-धीरे सांस को अंदर और बाहर छोड़ना है।
आप कुछ देर इसी स्थिति में बैठें।

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